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अयोध्या मामले में बोला सुप्रीम कोर्ट : जो बाबर ने किया अब वो बदल नहीं सकते जानिए और क्या क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

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अयोध्या मामले सुप्रीम कोर्ट ने अपना फासिला सुरक्षित रख लिया है . इस मामले की चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की संविधान पीठ ने द्वारा बुधवार को सुनवाई की गयी ,हालांकि कोर्ट ने अभी ये नहीं बताया है की वो इसका फैसला कब तक सुनाएगी . सुनवाई के समय मुस्लिम पक्ष जहाँ मध्यस्थता के लिए राजी दिखा , वहीँ हिन्दू महासभा और रामलला पक्ष ने इस पर सवाल उठाये और कहा की जनता मध्यस्थता के फैसले को मान्य नहीं करेगी .सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई क दौरान ये सुझाव दिया था की बेहतर होगा की दोनों पक्षों के लोफ बातचीत करके फैसला निकालें ,और कहा अगर कुछ फीसदी ही बातचीत करना संभव हो तो बात होनी चाहिए |

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सुनवाई से जुडी कुछ अहम् बातें :

1)- सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू महासभा से कहा की आप कह रहे है की इस मामले का समझौता संभव नहीं है ,चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में पांच जजों की संविधान पीठ ने यह आप कैसे कह सकते हैं और आप प्री जज कैसे कर सकते है |
2)-संविधान पीठ ने कहा की यह सिर्फ जमीन का मसला नहीं है यह मसला भावनाओ का भी है तो इसका परिणाम आपसी सहमति से हो तो ज्यादा सही है |
3)-जस्टिस बोबड़े ने कहा जो भी कुछ पहले हुआ उसमे हमारा नियंत्रण नहीं था , क्योंकि इतिहास जो भी था उसे हमे बदल नहीं सकते उस जगह पे मंदिर था या मस्जिद थी ये इतिहास है और हम उसके बदल नहीं सकते तो आपसी बातचीत ही इसका एक बेहतर मार्ग है |
4)-जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह केवल पार्टियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि दो समुदायों को लेकर विवाद है. हम मध्यस्थता के माध्यम से लाखों लोगों को कैसे बांधेंगे? यह इतना आसान नहीं होगा.
5)-साथं ही जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा शांति पूर्ण वातावरण बना रहे है यही सही है लेकिन सवाल ये है की ये कैसे संभव होगा? , आपसी बातचीत से ही ये सम्भव है ,मुस्लिम पक्ष के वकील ने कहा है की हम मध्यस्थता के लिए एकदम तैयार है |

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